Thursday, 15 November 2018

तुम अगर रात हो जाओ, तो तलब नही मुझे नींद की !

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तुम अगर रात हो जाओ ...?
तो तलब नही.... मुझे नींद की !!
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काश तू मेरी तनहाइयों का अंदाजा लगा सके,  
के  मैं जमाने से खफा हूँ ...... सिर्फ तेरे लिए। 
क्यों भटकता है यहाँ वहां सकूँ की तलाश में 
मैं दर्द-ए-दिल की शफा हूँ   ..सिर्फ तेरे लिए। 
दिल दे के हमे कभी घाटा नहीं होगा तुमको 
मैं मुनाफा ही मुनाफा हूँ ...... सिर्फ तेरे लिए। 
तू एक बार संजीदगी से  मुझे सोच के तो देख 
मदहोश कर दे वो नशा हूँ ...... सिर्फ तेरे लिए।
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ख़्वाब में तेरा आना-जाना पहले भी था आज भी है,,
तुझ से इक रिश्ता अन-जाना पहले भी था आज भी है,
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तुम से मिलने की नही
तुम में मिलने की चाह है..
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चैन तुमसे है करार तुमसे है 
जिन्दगी की बहार तुमसे है 
क्या करूगां पूरी दुनिया को लेकर
मेरे दिल को तो बस प्यार तुमसे है
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तमाम ख्वाहिशों ने मेरे सीने में खुदखुशी कर ली !

मैं जिन्दा तो हूँ , मगर किसी मज़ार से कम नहीं !!
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मोहब्बत हाथ में पहनी चूड़ी की तरह है
सवरती है खनकती है और खनक के टूट जाती है
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जैसी तुम दिखती हो वो बात नही आयी है.
लगता है ये तस्वीर किसी गेर से खिचवायी है.
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अपनी तो जिंदगी की अजब कहानी है, 
जिसे हमने चाहा वही हमसे बेगानी है 
हँसता हूँ दोस्तों को हँसाने के लिए, 
वरना इन आँखों में पानी ही पानी है।
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प्यास बढ़ती जा रही है बहता दरिया देख कर 
भागती जाती हैं लहरें ये तमाशा देख कर 
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शतरंज खेल रही है मेरी ज़िन्दगी कुछ इस तरह,
कभी तेरी मोहब्बत मात देती है कभी मेरी किस्मत 
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जब प्यार नही है तो भुला क्यों नही देते, 
ख़त किस लिए रखे है जला क्यों नही देते 
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जो तीर भी आता वो खाली नहीं जाता,
मायूस मेरे दिल से सवाली नहीं जाता,
काँटे ही किया करते हैं फूलों की हिफाज़त,

फूलों को बचाने कोई माली नहीं जाता।
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मेरी सांसो पर नाम बस तुम्हारा है, 
मैं अगर खुश हूं तो ये एहसान तुम्हारा है।
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नज़र उतार लूँ, या नज़र में उतार लूँ 
तुम आ जाओगे यूँ ही, या फिर से पुकार लूँ 
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